वज़ू और ग़ुस्ल के बदले तयम्मुम

वज़ू और ग़ुस्ल के बदले तयम्मुम
    सात सूरतें ऐसी हैं जिन में वुज़ू और ग़ुस्ल के बदले तयम्मुम करना चाहिए। तयम्मुम की पहली सूरत वुज़ू या ग़ुस्ल के लिए ज़रूरी मिक़दार में पानी मोहिय्या करना मुमकिन न हो। अगर इंसान आबादी में हो तो ज़रुरी है कि वुज़ू और ग़ुस्ल के लिए पानी को इस हद तक तलाश करे कि उसके मिलने से नाउम्मीद हो जाये और अगर बयाबान में हो तो ज़रुरी है कि रास् ...

तयम्मुम में वाजिब चीज़े

तयम्मुम में वाजिब चीज़े
    वुज़ू या ग़ुस्ल के बदले किये जाने वाले तयम्मुम में चार चाज़ें वाजिब हैं: (1) नियत (2) दोनों हथेलियों को एक साथ ऐसी चीज़ पर मारना या रखना जिस पर तयम्मुम करना सही हो। और एहतियाते लाज़िम यह है कि दोनों हाथों को एक साथ ज़मीन पर मारा या रखा जाये। (3) पूरी पेशानी पर दोनों हथेलियों को फ़ेरना और इसी तरह एहतियाते लाज़िम की बिना पर उस मक़ाम से ...

अहकामे मस्जिद

अहकामे मस्जिद
* मस्जिद की ज़मीन, अन्दरूनी व बाहरी छत और मस्जिद की दीवार को नजिस करना हराम है। और जिस इंसान को पता चले कि इनमें से कोई जगह नजिस हो गई है, तो ज़रूरी है कि उसकी निजासत को फ़ौरन पाक करे और एहतियाते मुस्तहब यह है कि मस्जिद की दीवार के बाहरी हिस्से को भी नजिस न किया जाये और अगर वह नजिस हो जाये तो निजासत को पाक करना ज़रूरी नही है। लेकिन अगर दीवा ...

मोहतज़र के अहकाम

मोहतज़र के अहकाम
जो ज़िन्दगी के आख़री लमहात में हो जो मुसलमान मोहतज़र हो, यानी अपनी ज़िन्दगी की अख़िरी साँसे ले रहा हो, चाहे वह मर्द हो या औरत, छोटा हो या बड़ा, एहतियात की बिना पर उसे इस तरह चित लिटाना चाहिए कि उसके पैरों के तलवें क़िबले की तरफ़ हों जायें। .  जब तक मय्यित को मुकम्मल तौर पर ग़ुस्ल न दिया जाये बेहतर है कि उसे किबला रुख़ लिटाए रख़े। लेकिन ज ...

अज़ान व इक़ामत के अहकाम

अज़ान व इक़ामत के अहकाम
अगर कोई इंसान किसी दूसरे की अज़ान जो एलान या जमाअत की नमाज़ के लिए कही जाए सुने तो मुस्तहब है कि उसका जो हिस्सा सुने उसे ख़ुद भी आहिस्ता आहिस्ता दोहराए। अगर किसी इंसान ने किसी दूसरे् की अज़ान व इक़ामत सुनी हो तो चाहे वह ुसने उन जुमलो को दोहराया हो या न दोहराया हो तो अगर अज़ान व इक़ामत और ुस नमाज़ के बीच जो वह पढ़ना चाहता है ज़्यादा फ़ा ...

अब अहकाम सीखे दो मिनट में

अब अहकाम सीखे दो मिनट में
ईश्वरीय अहकाम इन्सान की शक्ति के अनुसार हैं इस्लामी अहकाम आसान हैं कुछ नमूनों की तरफ़ हम इशारा करते हैं 1. वाजिब होना इंसान की शक्ति और क़ुदरत की हद भर है। 2. बीमार, विवश ... आदि के लिए नमाज़ रोज़ा आदि में सहूलत का दिया जाना। 3. यात्री के लिए नमाज़ में कंसेशन का होना। 4. बीमारी कुछ वाजिबों के समाप्तो होने का कारण बन जाती है, जैसे रोज़ा र ...

अब अहकाम सीखे 2 मिनट में

अब अहकाम सीखे 2 मिनट में
वह मौक़े जब नमाज़ समाप्त करने के बाद भी नमाज़ की अवस्था को समाप्त नहीं करना चाहिए नमाज़ का सलाम पढ़ते ही नमाज़ समाप्त हो जाती है और इसके लिए गर्द को दाएं या बाएं मोड़ना आवश्यक नहीं है, लेकिन कुछ स्थान ऐसे है जहां पर नमाज़ समाप्त होने के बाद भी इन्सान को क़िबले की तरफ़ से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। 1. जिस पर सजदा ए सहव वाजिब हो, ऐसे व्यक्त ...

ग़ुस्ले जनाबत की ज़रूरत

ग़ुस्ले जनाबत की ज़रूरत
* ग़ुस्ले जनाबत वाजिब नमाज़ पढ़ने और ऐसी ही दूसरी इबादतों के लिए वाजिब हो जाता है, लेकिन नमाज़े मय्यित,सजदा-ए-सह्व, सजद-ए-शुक्र और कुरआने मजीद के वाजिब सजदों के लिए ग़ुस्ले जनाबत ज़रूरी नही है। * ज़रूरी नही है कि इंसान ग़ुस्ल के वक़्त नियत करे कि वाजिब ग़ुस्ल कर रहा हूँ, बल्कि अगर अल्लाह की कुरबत के इरादे से ग़ुस्ल करे तो काफ़ी है। * अगर ...

मुस्तहब रोज़े

मुस्तहब रोज़े
हराम और मकरूह रोज़ों के अलावा जिन का ज़िक्र किया जा चुका है साल के तमाम दिनों के रोज़े मुस्तहब है और बाज़ दिनों के रोज़े रखने की बहुत ताकीद की गई है जिन में से चंद यह हैः (1) हर महीने की पहली और आख़री जुमेरात और पहला बुध जो महीने की दसवीं तारीख़ के बाद आये। और अगर कोई शख्स यह रोज़े न रखे तो मुस्तहब है कि उन की कज़ा करे और रोज़ा बिल्कुल न रख ...

मरने के बाद के अहकाम

मरने के बाद के अहकाम
मुस्तहब है कि मरने के बाद मैयित की आँखें और होंट बन्द कर दिये जायें और उसकी ठोडी को बाँध दिया जाए और उसके हाथ,पाँव सीधे कर दिये जायें। अगर मौत रात को हुई हो तो जहाँ मौत हुई हो वहाँ चिराग़ जलाए (रोशनी कर दे) और जनाज़े में शिरकत के लिए मोमिनीन को ख़बर दे और मैयित दफ़्न करने में जल्दी करे। लेकिन अगर उस इंसान के मरने का यक़ीन न हो तो इन्तेज़ ...

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