सूरए फ़त्ह का विवरण

सूरए फ़त्ह पवित्र क़ुरआन का 48वां सूरा है। यह सूरा मदीने में उतरा।  इसमें 29 आयतें है। इस सूरे के नाम से ही स्पष्ट है कि यह विजय और सफलता का संदेश दे रहा है। अरबी भाषा में फ़त्ह, सफलता या विजय को कहते हैं। शत्रुओं पर विजय, स्पष्ट व उल्लेखनीय सफलता। इस सूरे में निम्न लिखित बातों पर चर्चा हुई है। विजय व फ़त्ह की शुभ सूचना, हुदैबिया नामक संध ...

तीन शाबान के आमाल

तीन शाबान के आमाल
यह बड़ा बा-बरकत दिन है! शेख़ ने मिस्बाह में फ़रमाया है की ईस रोज़ ईमाम हुसैन (अस:) की विलादत हुई, ईमाम अस्करी (अ:स) के वकील क़ासिम बिन अल-हमादानी की तरफ़ से फ़रमान जारी हुआ की जुमारात 3 शाबान क़ो ईमाम हुसैन (अस:) की विलादत बा-सआदत हुई है! बस ईस दिन का रोज़ा रखो और यह दुआ पढ़ो .:. اَللَّهُمَّ إِنِّي اسئلكلُكَ بِحَقِّ ٱلْمَوْلُودِ فِي هٰذَا ٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ بِشَهَادَتِ ...

दुनिया की ऐसी किताब जिसमे बदलाव नही हुआ

दुनिया की ऐसी किताब जिसमे बदलाव नही हुआ
पवित्र क़ुरआन ऐसी आसमानी किताब है जिसमें थोड़ा सा भी फेर-बदल नहीं हुआ है।  इस्लाम, एक वैश्विक एवं अमर संविधान के रूप में है जिसमें आस्था, नैतिकता, विज्ञान और विभिन्न विषयों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है।  इस पवित्र पुस्तक में बताई गई बातों को व्यवहारिक बनाने में लोक परलोक का कल्याण सुनिश्चित है।  इस्लाम के निमयों के प्रति कटिबद् ...

साफ़ कपड़े पहनो और पवित्र खाना खाओ

साफ़ कपड़े पहनो और पवित्र खाना खाओ
सूरए आराफ़ की आयत संख्या 31 और 32 में ईश्वर कहता है। हे आदम की संतानो! हर मस्जिद के निकट (उपासना के समय) अपनी शोभा को धारण कर लो और खाओ पियो परंतु अपव्यय न करो कि  ईश्वर अपव्यय करने वालों को पसंद नहीं करता। (हे पैग़म्बर! ईमान वालों से) कह दीजिए कि किस ने उस शोभा को, जिसे ईश्वर ने अपने बंदों के लिए पैदा किया था और पवित्र रोज़ी को वर्जित कर दिया ...

वाहाबियत और क़ुरआन

वाहाबियत और क़ुरआन
क़ुरआन फ़रमाता हैः هُوَ مَعَكمُ‏ْ أَيْنَ مَا كُنتُم‏ ख़ुदा तुम्हारे साथ है तुम जहां भी रहो (सूर -ए- हदीद आयत 4)  وَنَحْنُ أَقْرَ‌بُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِ‌يدِ और हम धमनी से भी अधिक़ क़रीब हैं (सूर -ए- क़ाफ़ आयत 16) وَكَانَ اللَّـهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطًا और ख़ुदा सदैव हर चीज़ को घेरे है (सूर -ए- निसा आयत 126) فَأَيْنَمَا تُوَلُّوا فَثَمَّ وَجْهُ اللَّـهِ إِنَّ اللَّـهَ وَاسِعٌ عَلِيمٌ  तो जि ...

सूरए माएदा का विवरण

सूरए माएदा का विवरण
कुरआने मजीद के पांचवें सूरे का नाम माएदा है। माएदा का अर्थ दस्तरखान होता है और चूंकि इस सूरे में उस घटना का वर्णन है जिसमें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय भोजन और दस्तरखान के लिए प्रार्थना की थी इस लिए इस का नाम माएदा अर्थात दस्तरखान पड़  गया। वास्तव में यह पैगम्बरे इस्लाम को सूरे के रूप में प्राप्त होने वाला अंतिम संदेश है इसी ल ...

हक़ और बातिल के बीच कितनी दूरी है

हक़ और बातिल के बीच कितनी दूरी है
सकीना बानो अलवी (قال المجتبی علیه السلام فی جواب أسئلة رجل من أهل الشام) فی حدیث طویل: . قَالَ الشَّامِيُّ كَمْ بَيْنَ الْحَقِّ وَ الْبَاطِلِ وَ كَمْ بَيْنَ السَّمَاءِ وَ الْأَرْضِ وَ كَمْ بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَ الْمَغْرِبِ وَ مَا قَوْسُ قُزَحَ وَ مَا الْعَيْنُ الَّتِي تَأْوِي إِلَيْهَا أَرْوَاحُ الْمُشْرِكِينَ وَ مَا الْعَيْنُ الَّتِي تَأْوِي إِلَيْهَا أَرْوَاحُ الْمُؤْمِنِينَ وَ مَا الْمُؤَنَّثُ وَ مَا عَشَرَةُ أَشْيَاءَ بَعْضُهَا أَشَدُّ مِنْ بَعْضٍ؟ . ف ...

सूरह निसा का हिन्दी अनुवाद

सूरह निसा का हिन्दी अनुवाद
पवित्र क़ुरआन के एक सूरे का नाम निसा है जिसका अर्थ होता है महिलाएं। इस सूरे के इस नामंकन का एक कारण यह है कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और उनसे संबंधित मामलों का उल्लेख किया गया है। यह मदीने का सूरा है और इसमें 176 आयत है। मदीना में नई सरकार का गठन हुआ था। पैग़म्बरे इस्लाम की पूरी कोशिश थी कि अज्ञानता के काल की बची हुयी गंदगी को लोगों के ...

मुनाजाते ज़ाहेदीन

मुनाजाते ज़ाहेदीन
पंद्रहवीं दुआ بِسْمِ اﷲِ الرَحْمنِ الرَحیمْ إلھِی ٲَسْکَنْتَنا داراً حَفَرَتْ لَنا حُفَرَ مَکْرِہا وَعَلَّقَتْنا بِٲَیْدِی الْمَنایا فِی حَبَائِلِ غَدْرِہا فَ إلَیْکَ نَلْتَجِیَُ مِنْ مَکَائِدِ خُدَعِہا، وَبِکَ نَعْتَصِمُ مِنَ الاغْتِرارِ بِزَخَارِفِ زِینَتِہا، فَإنَّھَا الْمُھْلِکَۃُ طُلاَّبَھَا، الْمُتْلِفَۃُ حُلاَّلَھَا، الْمَحْشُوَّۃُ بِالْآفاتِ، الْمَشْحُونَۃُ بِالنَّکَبَاتِ ۔ आरम्भ करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृप ...

पनाह चाहने वालों की दुआ

पनाह चाहने वालों की दुआ
चौदहवी दुआ मुनाजाते मोतसेमीन (पनाह चाहने वालों की दुआ) بِسْمِ اﷲِ الرَحْمنِ الرَحیمْ اَللّٰھُمَّ یَا مَلاذَ اللاَّئِذِینَ، وَیَا مَعَاذَ الْعَائِذِینَ، وَیَا مُنْجِیَ الْھَالِکِینَ، وَیَا عَاصِمَ الْبَائِسِینَ، وَیَا رَاحِمَ الْمَساکِینِ، وَیَا مُجِیبَ الْمُضْطَرِّینَ، وَیَا کَنْزَ الْمُفْتَقِرِینَ،وَیَا جابِرَ الْمُنْکَسِرِینَ وَیَا مَٲْوَی الْمُنْقَطِعِینَ وَیَا نَاصِرَ الْمُسْتَضْعَفِینَ وَیَا مُجِیرَ الْخائِفِینَ، وَیَا مُ ...

हमसे संपर्क करें | RSS | साइट का नक्शा

इस वेबसाइट के सभी अधिकार इस्लाम14 के पास सुरक्षित हैं, वेबसाइट का उल्लेख करके सामग्री उपयोग किया जा सकता है। .