मौत का डर

मौत का डर
हदीस अन मुहम्मद बिन इस्माईल अन अबीहि क़ालः “ कुन्तु इन्दा अबि अब्दिल्लाह (अ.) इज़ा दख़लः अलैहि अबु बसीर फ़क़ालः या अबा मुहम्मद लक़द ज़कर कुमुल्लाह फ़ी किताबिहि फ़क़ालः “इन्ना इबादी लैसः लकः अलैहिम लिसुलतान।”[1]वल्लाहु मा अरादः इल्लल आइम्मह (अ.) व शियतिहिम फ़हल सररतुक या अबा मुहम्मद ? क़ालः क़ुल्तु जअलतु फ़िदाक ज़दनी....।[2] ” तर्जमा ...

पाप एक पल का, अज़ाब सदैव का यह कहा का न्याय है?

पाप एक पल का, अज़ाब सदैव का यह कहा का न्याय है?
हमारे पाठकों ने हमसे नर्कवासियों के बारे में ईश्वर के सदैव बाक़ी रहने वाले अज़ाब के बारे में प्रश्न किया है। सदैव अर्थात अबदियत को हम जैसे सीमित इन्सानों के लिए समझना बहुत ही कठिन है और इसको समझाना भी आसान नहीं है हम अबदियत के मुक़ाबले में चाहे जिनती बड़ी संख्या सोंच ले वह छोटी है। अगर अरबों खरबों कहा जाए तो यह भी छोटा शब्द है। को ...

दुआ में आसमान की तरफ़ हाथ क्यों उठाए जाते हैं?

दुआ में आसमान की तरफ़ हाथ क्यों उठाए जाते हैं?
लेखकः आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी अनुवादकः सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी कभी कभी लोगों के मन में प्रश्न उठता है कि जब ईश्वर के लिए कोइ विशेष स्थान नही है यानी वह हर स्थान पर है तो फिर दुआ करते समय आसमान की तरफ़ क्यों हाथ उठाते हैं? आसमान की तरफ़ देख कर क्यों प्रार्थना करते हैं? क्या ईश्वर आसमान में है? प्रिय पाठकों यह प्रश्न हमारे इमामो ...

इस दुनिया में सब मासूम क्यों नहीं हो सकते?

इस दुनिया में सब मासूम क्यों नहीं हो सकते?
ग़ज़ाली एहयाउल क़ुलूब के रजा (आशा) के भाग में लिखते हैं कि इब्राहीम अदहम का कहना है कि एक बार रात के समय मैं ख़ुदा के घर काबे का तवाफ़ कर रहा था, और उस समय मेरे अतिरिक्त कोई और ख़ुदा के घर का तवाफ़ करने वाला नही था। उस समय मैं अकेला था। तब मैने काबे के ग़िलाफ़ (वह पर्दा जिससे काबा ढका रहता है) को पकड़ कर ईश्वर से दुआ मांगी कि मुझे पापों से ब ...

सबसे बड़ा पर्दा क्या है

सबसे बड़ा पर्दा क्या है
इन्सान का सबसे बड़ा पर्दा कौन सा है जो इन्सान को ख़ुदा तक पहुँचने से रोकता है? यह बात यक़ीन के साथ कही जा सकती है कि ख़ुद ख़वाही (केवल अपने आप को चाहना), ख़ुद बरतर बीनी (अपने आप को दूसरों से बेहतर समझना),व ख़ुद महवरी (केवल अपने आप को सबका केन्द्र समझना) से बुरा कोई पर्दा नही है। इल्में अख़लाक़ के कुछ बुज़ुर्ग उलमा का कहना है कि ख़ुदा की राह ...

क्या इमाम ज़माना का अक़ीदा इन्सान को अमल से रोकता है?

क्या इमाम ज़माना का अक़ीदा इन्सान को अमल से रोकता है?
सैय्यदा सकीना बानों अलवी कुछ लोग कहते हैं किः इमामे ज़माना, महदवियत और इमाम के ज़ोहुर या प्रकट होने का विश्वास और उसपर अक़ीदा रखना इस्लामी समाज में ऐसा ही है कि जो लोगों को ख़ुदा पर भरोसा और तवक्कुल की तरफ़ ले जाता है और उनको कार्य करने से रोकता है... अगर सही प्रकार से देखा जाए तो यह कहना केवल उन लोगों का है जिन्होंने महदवियत को सही प ...

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