पहचानें कौन है अबू बक्र बग़दादी

पहचानें कौन है अबू बक्र बग़दादी
पहचानें कौन है अबू बक्र बग़दादी अचानक ही रातों रात अबू बक्र बग़दादी के नेतृत्व में आईएसआईएल या आईएसआईएस के आतंकियों ने इराक़ के कुछ क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर लिया। आजकल इस आतंकी गुट का नाम हर व्यक्ति की ज़बान पर है। अब प्रश्न यह उठता है कि पुरी दुनिया विशेषकर मध्यपूर्व में आतंक का प्रतीक आईएसआईएस का सरग़ना कौन है और कहां से उसका स ...

क़यामत के अक़ीदे के बिना जीवन व्यर्थ

क़यामत के अक़ीदे के बिना जीवन व्यर्थ
हमारा अक़ीदा है कि मरने के बाद एक दिन तमाम इंसान दोबार जीवित होगें और अपने कार्यों  के अनुसार हिसाब किताब के बाद नेक लोगों को जन्नत में एवं गुनाहगारों को दोज़ख़ में भेज दिया जायेगा और वह हमेशा वहीं पर रहेगें। “اللَّـهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَ‌يْبَ فِيهِ” सूरा निसा आयत 87 यानी अल्लाह के अलावा कोई माबूद न ...

पैग़म्बर के बाद हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का मर्सिया

 पैग़म्बर के बाद हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का मर्सिया
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा पर दुखों के पहाड़ कब से टूटना आरम्भ हुए इसके बारे में यही कहा जा सकता है कि जैसे ही पैग़म्बरे इस्लाम ने इस संसार से अपनी आखें मूंदी, मुसीबतें आना आरम्भ हो गईं, और इन मुसीबतों का सिलसिला एक के बाद एक बढ़ता ही चला गया। इतिहासकारों ने लिखा है कि पैग़म्बर की शहादत के बाद तीन दिन तक उनका जनाज़ा रखा रहा और मुसलमान सक़ीफ ...

महान सुन्नी विद्वान शेख़ शलतूत का फ़तवा

महान सुन्नी विद्वान शेख़ शलतूत का फ़तवा
इस्लाम धर्म ने अपने अनुयाईयों में से किसी को भी किसी ख़ास धर्म का अनुसरण करने के लिए बाध्य नही किया है बल्कि कोई भी मुसलमान किसी भी धर्म पर जो सही तरह से नक़्ल हुआ हो और जिस के अहकाम उसकी किताबों में बयान हुए हों पर अमल कर सकता है। इसलिये चारो धर्मों में से किसी का भी अनुयाई किसी भी दूसरे धर्म का अनुयाई बन सकता है। शिया इसना अशरी एक ऐ ...

फ़िदक छीने जाने पर नबी की बेटी का अबूबक्र से क्रोधित होना

फ़िदक छीने जाने पर नबी की बेटी का अबूबक्र से क्रोधित होना
जब पहले ख़लीफ़ा हज़रत अबू बक्र ने फ़ातेमा (स) से फ़िदक छीन लिया तो आपने उसको पाने का प्रयन्त किया और कभी उसको रसूल (स) का दिया हुआ उपहार कहकर वापस मांगा तो कभी मीरास, और यह फ़ातेमा (स) का अधिकार था कि वह अपने हक़ को वापस मांगती और जिस प्रकार  से भी साबित कर सकतीं कि वह उनका हक़ है उसको साबित करती। लेकिन जब पहले ख़लीफ़ा ने उनको फ़िदक वापस न ...

हज़रत रसूले ख़ुदा (स) का आशिक़

हज़रत रसूले ख़ुदा (स) का आशिक़
एक शख़्स हज़रत रसूले ख़ुदा से बेहद मोहब्बत करता था, और तेल (रौग़ने ज़ैतून) बेचने का काम किया करता था। उस के बारे में यह ख़बर मशहूर थी कि वो सिदक़े दिल से रसूले ख़ुदा (स.) से बेपनाह इश्क व मोहब्बत करता था और आँ हज़रत (स) को बहुत चाहता था, अगर एक दिन भी आँ हज़रत को नहीं देख़ता तो बेताब हो जाता था और जब भी किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर जाता थ ...

दुनिया से दिल लगाने की सज़ा

दुनिया से दिल लगाने की सज़ा
इमाम सादिक़ (अ) ने दुनिया से दिल लगाने के बारे में फ़रमायाः एक दिन हज़रत ईसा (अ) अपने हवारियों के साथ टहल रहे थे चलते चलते वह एक गांव के पास पहुंचे तो क्या देखा कि उस गांव के सारे लोग रास्ते और घरों में मरे हुए पड़े थे। आपने फ़रमाया कि यह लोग अपनी मौत नहीं मरे हैं, अवश्य ही इन पर ईश्वर का क्रोध आया है और यह इस हालत में पहुंचे हैं। हज़रत ई ...

इन्सान के शरीर से आत्मा कैसे निकलती है

इन्सान के शरीर से आत्मा कैसे निकलती है
[ इसमें मलकुल मौत (यमराज) और उस के क़ब्ज़े रुह (प्राण निष्कासन) करने के ज़िक्र फ़रमाया है ] जब मलकुल मौत किसी के घर में दाखिल होते हैं तो कभी तुमं उस की आहट महसूस करते हो ? या जब किसी की रुह क़ब्ज़ करता है, तो क्या तुम उसे देखते हो ? हैरत (आश्चर्य) है कि वह किस तरह मां के पेट से बच्चे की रुह क़ब्ज़ कर लेता है ? क्या वह मां के जिस्म (शरीर) के किसी हि ...

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की हदीसें

इमाम हुसैन  अलैहिस्सलाम की हदीसें
1- قال الحسین علیه السلام: اَلبَخیلُ مَن بَخِلَ بِالسَّلامِ؛ इमाम हुसैन (अ) ने फ़रमायाः कंजूस वह व्यक्ति जो सलाम करने में कंजूसी करे (यानी सलाम न करे) 2- قال الحسین علیه السلام: لِلسَّلامِ سَبعُونَ حَسَنَةً، تِسعٌ وَ سِتُّونَ لِلمُبتَدِءِ وَ واحِدَةٌ لِلرّادِّ؛ इमाम हुसैन (अ) ने फ़रमायाः सलाम करने में सत्तर सवाब और नेकियाँ हैं उनहत्तर सलाम करने वाले के लिे और एक जवाब देने वाले ...

शैतान से होशियार रहो!

शैतान से होशियार रहो!
  قال الامام محمد بن علی الباقر علیہ السلام «إِنَّ الشَّیطَانَ یغْرِی بَینَ الْمُؤْمِنِینَ- مَا لَمْ یرْجِعْ أَحَدُهُمْ عَنْ دِینِهِ- فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ اسْتَلْقَى عَلَى قَفَاهُ وَ تَمَدَّدَ ثُمَّ قَالَ فُزْتُ- فَرَحِمَ اللَّهُ امْرَأً أَلَّفَ بَینَ وَلِیینِ لَنَا یا مَعْشَرَ الْمُؤْمِنِینَ تَأَلَّفُوا وَ تَعَاطَفُوا » इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं: शैतान सदैव मोमिनों और हमारे दोस्तों के बीच फूट, बुराई और फ़स ...

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