इस क्रान्ति को ईश्वर का समर्थन हासिल है

इस क्रान्ति को ईश्वर का समर्थन हासिल है
ईरान में इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के नेतृत्व में इस्लामी क्रान्ति की सफलता और मूल इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर सरकार के गठन ने राजनीति की दुनिया में नए अध्याय को जोड़ा। विभिन्न क्रान्तियों व सरकारों के अस्तित्व का औचित्य पेश करने वाले विचारों में इस्लामी क्रान्ति एक अद्वितीय घटना थी। यह ऐसी घटना थी जो राजनेताओं के पारंपरिक ...

शेख़ निम्र की आख़री मुलाक़ात अपने परिवार के साथ

शेख़ निम्र की आख़री मुलाक़ात अपने परिवार के साथ
आयतुल्लाह शेख़ निम्र के भाई ने इस शहीद मुजाहिद के साथ अपनी अंतिम मुलाक़ात की बारे में लिखा हैः मोहम्मद अन्निम्र शेख़ निम्र के साथ अंतिम मुलाक़ात के बारे में कहते हैं: मैं, मेरी माँ, हमारे भाई और मेरी बहन शेख़ निम्र की बेटी सकीना के साथ सुबह ही रियाज़ की जेल हाएर पहुँच गए, लेकिन उन्होंने हमको 12 बजे दिन तक मिलने नहीं दिया मेरी माँ और भा ...

तीन शाबान के आमाल

तीन शाबान के आमाल
यह बड़ा बा-बरकत दिन है! शेख़ ने मिस्बाह में फ़रमाया है की ईस रोज़ ईमाम हुसैन (अस:) की विलादत हुई, ईमाम अस्करी (अ:स) के वकील क़ासिम बिन अल-हमादानी की तरफ़ से फ़रमान जारी हुआ की जुमारात 3 शाबान क़ो ईमाम हुसैन (अस:) की विलादत बा-सआदत हुई है! बस ईस दिन का रोज़ा रखो और यह दुआ पढ़ो .:. اَللَّهُمَّ إِنِّي اسئلكلُكَ بِحَقِّ ٱلْمَوْلُودِ فِي هٰذَا ٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ بِشَهَادَتِ ...

शाबान महीने की मुनासेबतें

  शाबान महीने की मुनासेबतें
1 शाबान – विलादत – हज़रत बीबी ज़ैनब (स:अ)  5 हिजरी   3 शाबान – विलादत हज़रत इमाम हुसैन (अ:स)   4 हिजरी 4 शाबान – विलादत हज़रत अब्बास अलमदार 26 हिजरी 5 शाबान – विलादत हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) 38 हिजरी   7 शाबान – विलादत हज़रत क़ासिम इब्ने हसन (अ:स) 48 हिजरी 11 शाबान – विलादत हज़रत अली अकबर इब्ने हुसैन (अ:स) 44  हिजरी   15 शाबान – विलादत हज़रत वली-उल-असर ई ...

इस गुफ़ा मे पैग़म्बर (स) करते थे उपासना

इस गुफ़ा मे पैग़म्बर (स) करते थे उपासना
पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेहि व सल्लम चालिस वर्ष के हो चुके थे।  . वह शहर के हो हल्ले से दूर रहकर प्रकृति के आंचल में जाते थे। हिरा नाम की गुफा थी जिसमें पैग़म्बरे इस्लाम महान व सर्वसमर्थ ईश्वर की उपासना करते थे। वह पहाड़ पर से देखते थे कि लोग किस प्रकार दिग्भ्रमित हैं लोग किस प्रकार बुरी चीज़ों के अभ्यस्त हो गये हैं ...

हराम महीनो में भी बह रहा है मुसलमानों का ख़ून +तस्वीरें

हराम महीनो में भी बह रहा है मुसलमानों का ख़ून +तस्वीरें
राजा और अमीरात सशस्त्र बलों के उप सुप्रीम कमांडर ने सऊदी अरब के बादशाह के बेटे जो रक्षा मंत्री भी हैं से मुलाक़ात की और क्षेत्र के हालात विशेषकर यमन के बारे में बातचीत की। . टीवी शिया मोहम्मद बिन ज़ाएद आले नहयान जो अमीराती सैनिकों से मुलाक़ात के लिये मलिक फ़हद एयरबेस गये थे ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुल ...

रजब की पहली रात और दिन के आमाल

रजब की पहली रात और दिन के आमाल
पहली रात के आमाल यह बहुत पवित्र रात है और इसके लिए कुछ आमाल बताए गए हैं 1.    जब इस महीने का चाँद दिखाई दे तो कहे اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَیْنَا بِالْأَمْنِ وَ الْإِیمَانِ وَ السَّلامَةِ وَ الْإِسْلامِ رَبِّى وَ رَبُّكَ اللهُ عَزَّ وَ جَلَّ.  और पैग़म्बरे इस्लाम (स) से रिवायत है कि जब रजब का चाँद दिखाई दे तो कहे اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِى رَجَبٍ وَ شَعْبَانَ وَ بَلِّغْنَا شَهْرَ رَمَضَانَ وَ ...

रजब महीने का पहला गुरुवार (लैलतुल रग़ाएब) के आमाल

रजब महीने का पहला गुरुवार (लैलतुल रग़ाएब) के आमाल
रजब महीने की पहली शबे जुमा (गुरुवार की रात) को लैलतुर रग़ाएब कहा जाता है यानी आर्ज़ूओं और कामनाओं की रात ... . इस महान रात के कुछ ख़ास आमाल हैं, हमारी अगर कोई इच्छा कोई दुआ है और हम चाहते हैं कि अपनी कोई आरज़ू को पूरा कराएं तो हमको इस रात में ईश्वर की बारगाह में हाथ फैलाने चाहिएं और ख़ुदा से उनको पूरा करने की दुआ करनी चाहिए। . सबसे पहले हमे ...

रजब के महीने की महानता और आमाल

रजब के महीने की महानता और आमाल
सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी ग़ौरतलब है कि इस्लामी कैलेंडर में रजब, शाबान और रमज़ान के महीनों को बहुत अहमियत हासिल है और बहुत सी रिवायतों में इनकी श्रेष्ठता और फ़ज़ीलत के बारे में बयान हुई हैं। जैसा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने फ़रमाया है कि रजब का महीना ईश्वर के नज़दीक बहुत महत्वता रखता है, कोई भी महीना पवित्रता और फ़ज़ीलत में इसके बरा ...

रजब के महीने में रोज़ाना पढ़ी जानी वाली दुआएं

रजब के महीने में रोज़ाना पढ़ी जानी वाली दुआएं
सकीना बानो अलवी रजब के महीने में यह दुआ रोज़ाना की नमाज़ों के बाद ताक़ीबात के तौर पर पढ़ी जाती है  يا مَنْ اَرْجُوهُ لِكُلِّ خَيْرٍ، وَ آمَنُ سَخَطَهُ عِنْدَ كُلِّ شَرٍّ، يا مَنْ يُعْطِى الْكَثيرَ  بِالْقَليلِ، يا مَنْ يُعْطى‏ مَنْ سَئَلَهُ، يا مَنْ يُعْطى‏ مَنْ لَمْ يَسْئَلْهُ وَ مَنْ لَمْ يَعْرِفْهُ‏  تَحَنُّناً مِنْهُ وَ رَحْمَةً، اَعْطِنى‏ بِمَسْئَلَتى‏ اِيَّاكَ، جَميعَ خَيْرِ الدُّنْيا وَ جَميعَ خَيْرِ  الْأخِ ...

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