स्वर्ण कथन पैग़म्बरे इस्लाम स

  इंसान अपने दोस्त के धर्म पर चलता है। तो तुममें से हर एक को चाहिये कि वह देखे कि किस के साथ दोस्ती कर रहा है। हमारे बेहतरीन अनुयाई क़नाअत करने वाले हैं और उनमें सबसे बुरे लालची हैं।   ईश्वर अपनी नेअमत के प्रभाव को अपने बंदे में देखना चाहता है।   जो व्यक्ति कंजूसी करे और स्वतंत्रता व अधिकार के साथ अपने माल से अच्छे लोगों को न दें तो ...

इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम का जन्म दिन

इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम का जन्म दिन
ईश्वरीय दूतों और उनके उत्तराधिकारियों की ज़िन्दगी सत्य पर अमल और ईश्वरीय आदेश के पालन का साक्षात रूप है। इन महापुरुषों ने लोगों को ईश्वर के मार्ग पर बुलाने के लिए अलग अलग तरह की शैलियां अपनायी हैं। इन महापुरूषों के जीवन पर थोड़ी सी नज़र डालने से इंसान का मन समीर की भांति आनंद का एहसास करता है। इन महापुरुषों के जन्म दिवस या जयंती से ...

हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का जन्म दिन

हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का जन्म दिन
आज एक ऐसे महान व्यक्ति की जन्म तिथि है जिसके नाम से इतिहास में बलिदान व वफ़ादारी रची बसी है और जिस की साहसपूर्ण जीवनी इतिहास के पन्नों पर जगमगा रही है। . हिजरी क़मरी कैलेन्डर के शाबान महीने की चार तारीख़ अली के पुत्र हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस से सजी हुई है। उन्हें उनके अत्यधिक सदगुणों के कारण अबुलफज़्ल अर्थात गुणों के ...

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म दिन

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म दिन
3 शाबान सन चार हिजरी क़मरी को मदीना शहर ईश्वरीय दूत पैग़म्बरे इस्लाम के परिवार में एक बच्चे के आगमन का मेज़बान था। ऐसा परिवार जिसे ततहीर नामक आयत उतरने के बाद पैग़म्बरे इस्लाम बार बार ईश्वरीय दूत के परिजन कह कर संबोधित करते और सलाम करते थे। उस दिन पैग़म्बरे इस्लाम इमाम हुसैन के सूर्य समान वजूद के प्रकट होने का इंतेज़ार कर रहे थे। जि ...

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मीठे बोल

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मीठे बोल
1. उस काम से दूर रहो जिसे करने के बाद क्षमा मांगनी पड़े क्योंकि धर्म पर आस्था रखने वाला न बुराई करता है और लोगों से क्षमा मांगता है। . 2. उस काम से दूर रहो जिसे करने के बाद क्षमा मांगनी पड़े क्योंकि धर्म पर आस्था रखने वाला न बुराई करता है और लोगों से क्षमा मांगता है। . 3. सर्वोत्म बात कहना और वार्ता के संस्कारों को पहचानना बुद्धिमान के चि ...

आख़िर कौन थे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम

आख़िर कौन थे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम
पिछले 1400 वर्षों के दौरान, साहित्य की एक अभूतपूर्व राशि  दुनिया की लगभग हर भाषा में इमाम हुसैन (अ) , पर लिखी गयी है, जिसमे  मुख्य रूप से इमाम हुसैन (अस) के सन 61हिजरी में कर्बला में अवर्णनीय बलिदान का विशेष अस्थान और सम्मान है! . सभी मुसलमान इस बात पर सहमत हैं कि कर्बला के  महान बलिदान ने इस्लाम धर्म को विलुप्त होने से  बचा  लिया ! हालांकि, कुछ ...

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का संक्षिप्त जीवन परिचय

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का संक्षिप्त जीवन परिचय
अल्लाह तबारक व तआला ने तमाम आलमें इंसानियत के रुश्द व हिदायत के लिये इस्लाम में कई ऐसी हस्तियों को पैदा किया जिन्होने अपने आदात व अतवार, ज़ोहद व तक़वा, पाकीज़गी व इंकेसारी, जुरअतमंदी, इबादत, रियाज़त, सख़ावत और फ़साहत व बलाग़त से दुनिया ए इस्लाम पर अपने गहरे नक्श छोड़े हैं, उन में बिन्ते रसूल (स), ज़ौज ए अली और मादरे गिरामी शब्बर व शब्बी ...

नहजुल बलाग़ा से इमाम अली के (अ) के मीठे बोल

नहजुल बलाग़ा से इमाम अली के (अ) के मीठे बोल
सकीना बानो अलवी 1- फ़ित्ना व फ़साद में उस तरह रहो जिस तरह ऊंट का वह बच्चा जिसने अभी अपनी उम्र के दो साल ख़त्म किये हैं के न तो उसकी पीठ पर सवारी की जा सकती है और न उसके थनों से दूध दोहा जा सकता है। . 2- जिसने लालच को अपना वस्त्र बनाया,  उसने अपने को अपमानित किया और जिसने अपनी समस्याओं को ज़ाहिर किया वह तिरस्कार पर राज़ी हो गया, और जिसने अपनी ...

हज़रत अली अलैहिस्सलाम का जन्म दिन

हज़रत अली अलैहिस्सलाम का जन्म दिन
रजब का महीना था। ईमान से ओत- प्रोत हज़रत फातेमा बिन्ते असद भी दूसरे लोगों की भांति काबे की परिक्रमा कर रही थीं कि अचानक उन्होंने प्रसव पीड़ा का आभास किया। उन्होंने महान ईश्वर से प्रार्थना आरंभ कर दी। उन्होंने कहा हे पालनहार! मैं तुझ पर, समस्त पैग़म्बरों पर, समस्त ईश्वरीय दूतों पर और उनके द्वारा लायी गयी किताबों पर ईमान रखती हूं। तू ...

इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की विलादत

इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की विलादत
आज रजब महीने की १० तारीख़ है। आज ही के दिन 195 हिजरी क़मरी में हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के सुपुत्र और भलाई व दान की प्रतिमूर्ति इमाम जवाद अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ था। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम पैग़म्बरे ने इस्लाम की परंम्परा के अनुसार इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम के दाहिने कान में अज़ान और बायें कान में इक़ामत कही। जिस दिन इमाम मोह ...

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