इमाम अली नक़ी (अलैहिस्सलाम) के स्वर्ण कथन भाग 3

grey इमाम अली नक़ी (अलैहिस्सलाम) के स्वर्ण कथन भाग 3

 

सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी

21- قال الإمام الهادی علیه السلام:

راکِبُ الحَروُنِ اَسیرُ نَفْسِهِ، وَ الجاهِلُ اَسِیرُ لِسانِهِ؛

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

जो अपनी इच्छाओं का क़ैदी हो जाए, वह उस सवार की भाति है जो बिगड़ैल घोड़े पर सवार हो, और अज्ञानी व्यक्ति अपनी ज़बान का क़ैदी है।

(बिहारुल अनवार, जिल्द 75, पेज 369)

22- دخل علی بن محمد (علیه السلام) على مریض من أصحابه و هو یبکی و یجزع من الموت ، فقال له:

یا عبد الله تخاف من الموت لأنک لا تعرفه، أ رأیتک إذا اتَّسَختَ و تقذَّرت و تأذَّیت من کثرة القذر و الوسخ علیک و أصابک قروح و جُربٌ و علمت أنَّ الغَسلَ فی حمام یزیل ذلک کله؟ أ ما تُریدُ أن تدخله فتغسل ذلک عنک أو ما تکره أن لا تدخله فیبقى ذلک علیک؟

قال: بلى یا ابن رسول الله.

قال: فذاک الموت هو ذلک الحمام و هو آخر ما بقی علیک من تمحیص ذنوبک و تنقیتک من سیئاتک فإذا أنت وردت علیه و جاوزته فقد نجوت من کل غم و هم و أذى و وصلت إلى کل سرور و فرح. فسکن الرجل و استسلم و نشط و غمض عین نفسه و مضى لسبیله.

इमाम अली नक़ी (अ) अपने एक बीमार साथी को देखने गये, इस अवस्था में कि वह व्यक्ति मौत के डर रो और चिल्ला रहा था,

तो इमाम ने उससे फ़रमायाः तुम इसलिये मौत से डर रहे हो कि उसकी वास्तविकता को नहीं जानते हो, क्या अगर एसा हो कि तुम्हारा शरीर मवाद से भर जाये और बदबूदार हो जाए, और गंदगी और मवाद की अधिकता से परेशान हो जाओ और इसके अतिरिक्त तुम्हारे शरीर में ज़ख़्म हो जाए और तुमकों गैरी रोग लग जाये, और तुमको पता हो की एक हम्माम में नहा कर इन सारी समस्याओं को दूर किया जा सकता है तो क्या तुम नहीं चाहोंगे कि उस हम्माम में जाओ? या उससे दूर भागोगे और चाहोगे कि यह मवाद और बीमारी तुम्हारे शरीर पर बाक़ी रहें?

उसने कहाः हे पैग़म्बर के बेटे (उस हम्माम में चला जाऊँगा)

इमाम ने फ़रमायाः मौत भी इसी तरह है, हम्माम की भाति है और मौत पापों की समाप्ति का अन्तिम पड़ाव और तुम्हारी बुराईयों से पवित्र हो जाने का रास्ता है, तो जब तुम उस पड़ाव पर पहुंच जाओगे और उससे आगे निकल जाओगे तो वास्तव में हर दुख, ग़म, परेशानी से नजात पा गये होगे और सच्ची ख़ुशी और सौभाग्य तक पहुंच गये होगे।

तब उस व्यक्ति को सुकून हो गया और प्रसन्न हो गया और मौत के लिये तैयार हो गया और आखें बंद की और दुनिया से चला गया।

(मआनियुल अख़बार, पेज 290)

23- قال الإمام الهادی علیه السلام:

اَذْکُرْ حَسَراتِ التَّفْرِیطِ بِاَخْذِ تَقْدیمِ الْحَزْمِ؛

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

कार्यों को अंजाम देने में काहिली पर अफ़सोस की दृण निश्चय से पूर्ति करो।

(बिहारु अनवार जिल्द 75, पेज 370)

24- قال الإمام الهادی علیه السلام:

لَولا مَنْ يَبْقي بَعْدَ غَيْبَةِ قائِمِکُمْ عليه‏ السلام مِنَ الْعُلَماءِ، الدّاعينَ اِلَيْهِ، وَ الدّالّينَ عَلَيْهِ وَ الذّابّينَ عَنْ دينِهِ بِحُجَجِ اللّه‏ِ

وَ المُنْقِذينَ لِضُعَفاءِ عِبادِ اللّه‏ِ مِنْ شِباکِ اِبْليسَ وَ مَرَدَتِهِ وَ مِنْ فِخاخِ النَّواصِبِ الَّذينَ يُمْسِکون َاَزِمَّةَ قُلوبِ ضُعَفاءِ الشّيعَةِ کَما يُمْسِکُ السَّفينَةَ سُکّانَها، لما بقی أحد إلاّ ارتدَّ عن دین الله، أولئک هم الأفضلون عند الله عزّ و جلّ.

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

अगर हज़रत क़ाएम (अ) की ग़ैबत के बाद ओलेमा न होते जो लोगों को उनकी तरफ़ बुलाते और उनके पवित्र वुजूद पर तर्क और मार्गदर्शन करते, और उसके ईश्वरीय धर्म की आसमानी हुज्जत के माध्यम से सुरक्षा न करते, और ईश्वर के कमज़ोर बंदों को हमारे शत्रुओं के जालों से जो हमारे कमज़ोर ईमान शियों के दिलों को कश्ती ने नाविकों की भाति अपने हाथों में लिये हुए है, न बचाते, तो दुनिया में कोई भी बाक़ी नहीं बचता मगर यह कि वह ईश्वरीय दीन से फिर गया होता, इस प्रकार के ओलेमा और धार्मिक विद्वान ईश्वर के नज़दीक सबसे श्रेष्ठ लोग हैं।

(एहतेजाज, जिल्द 2, पेज 260)

25- قال الإمام الهادی علیه السلام:

اَلمِراءُ یفْسِدُ الصَّداقَهَ القَدِیمَهَ وَ یحِلِّلُ العُقْدَهَ الوَثیقَهَ وَ اَقَلُّ ما فیه اَنْ تَکُونَ فیها الْمُغالَبَهُُ وَ الْمُغالَبَهُ اُسُّ اَسْبابِ القَطِیعَهِ؛

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

बहस (वाद विवाद) बुरानी दोस्ती को बरबाद कर देता है, और विश्वास की गांठ को खोल देता है, सबसे छोटी चीज़ जो (बहस में) है वह दूसरे पर श्रेष्ठा सिद्ध करना है जो कि जुदाई का कारण है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 75, पेज 369)

26- قال الإمام الهادی علیه السلام:

خَیرٌ مِنْ الخیر فاعِلُهُ، و اَجْمَلُ من الجمیل قائِلُهُ، و اَرْجَحُ من العلم حامِلُهُ، وَ شَرٌّ مِنَ الشَرِّ جالِبُه، وَ اَهُوَلَ مِنَ الهَوْلِ راکِبُهُ؛

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

नेकी से बेहतर नेकी करने वाला है, सुन्दरता से सुंदर उसको कहने वाला है, और ज्ञान से बेहतर उसके उठाने वाला है, और बुराई से बुरा उसका करने वाला है, और भय से बड़ा भय उसके लाने वाला है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 75 पेज 370)

27- قال الإمام الهادی علیه السلام:

الْعُجْبُ صارِفٌ عَنْ طَلَبِ الْعِلْمِ داع إلَي الْغَمْطِ.

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

अपने को बड़ा समझना ज्ञान प्राप्ती की राह में रुकावट होगा परिणाम स्वरूप इन्सान को गर्त और अज्ञानता में रखेगा।

(बिहारुल अनवार जिल्द 69, पेज 199)

28- قال الإمام الهادی علیه السلام:

اِيّاكَ وَالْحَسَدَ فَاِنَّهُ يَبينُ فيكَ وَلايَعْمَلُ فى عَدُوِّكَ؛

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

हसद से दूर रहो, क्योंकि तुम्हारी जलन खुल जाएगी और तुम्हारे शत्रु पर कोई प्रभाव भी नहीं डालेगी।

(बिहारु अनवार जिल्द 78,  पेज 370)

29- قالَ الإمامُ الهادي – عليه السلام – :

لا تَطْلُبِ الصَّفا مِمَّنْ كَدِرْتَ عَلَيْهِ، وَلاَ النُّصْحَ مِمَّنْ صَرَفْتَ سُوءَ ظَنِّكَ إلَيْهِ، فَإنَّما قَلْبُ غَيْرِكَ كَقَلْبِكَ لَهُ.

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

जिसके लिये तुम्हारे दिल में नफ़रत और कीना हो उससे मोहब्बत न चाहो, इसी प्रकार जिसके बारे में ग़लत सोंच रखते हो उससे नसीहत और सीख न मांगो, क्योंकि उसकी और दूसरों की सोंच भी तुम्हारे लिये वही होगी जो तुम्हारे दिल में उसके लिये हैं।

(बिहारुल अनवार जिल्द 75, पेज 369)

30- قال الإمام الهادی علیه السلام:

العقوق یعقب القلة و یؤدی الی الذلّة.

इमाम अली नक़ी (अ) ने फ़रमायाः

माता पिता से आक़ होना पैसे में कमी का कारण है और व्यक्ति को दुनिया में अपमान और ज़िल्लत की तरफ़ ले जाता है।

(मुस्तदरकुल वसाएल, बाब 75, हदीस 29)

 

 

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